निम्‍नतापीय इंजीनियरिंग एवं निम्नताप चुंबक प्रौद्यौगिकी अनुभाग

पूर्णतः स्वदेशी हीलियम द्रवीकरण सयंत्र का विकास

हीलियम एक निष्क्रिय गैस है। सभी तत्वों में इसका क्वथनांक सबसे कम -268.93 डिग्री सेल्सियस होता है। इसके द्रव का प्रयोग पदार्थों को कम तापमान पर ठंडा करने के लिए होता है, जैसे अतिचालक चुंबको एवं अतिचालकता आधारित रेडिओ आवृति केविटी को 1.8 केल्विन तक ठंडा कर सम्बंधित प्रयोग किये जाते है।

14 अगस्त 2010 रात को 09:15 बजे अनेको अथक प्रयास के बाद पूर्णतः स्वदेशी अभिकल्पित एवं उससे जुड़े तकनिकी विकास के अनेक प्रयोगों द्वारा हम हीलियम गैस को द्रवीकरण करने में कामयाब हो पाए। हीलियम द्रवीकरण की मशीन पश्चाग्र विस्तारक इंजन, ऊष्मा विनिमयको के समूह पर आधारित है। सभी महत्वपूर्ण अवययों का अभिकल्पन एवं निर्माण अपने ही केंद्र पर किया गया है। पहली बार इस मशीन का हीलियम द्रवीकरण दर 6 लीटर/घंटा था, और इसके निरंतर तकनिकी विकास के द्वारा अभी इसकी उत्पादन क्षमता 44 लीटर/घंटा है। नीचे दिए एक ग्राफ के माध्यम से उत्पादन क्षमता की दर को विभिन्न समय के साथ दिखाया गया है।

चित्र 1 द्रवीकरण उत्पादन क्षमता का समय के साथ विकास
चित्र 1 द्रवीकरण उत्पादन क्षमता का समय के साथ विकास


हीलियम द्रवीकरण सयंत्र में विभिन्न अवययों का समावेश है, जिसमे पश्चाग्र विस्तारक इंजन के द्वारा प्रशीतन पैदा होता है। इसमें दक्ष ऊष्मा विनिमयको का समूह, दाब नियंत्रण वॉल्ब, तापमान एवं दाब मापक प्रणाली है। इन सभी अवयवों को बहुपरतीय ताप प्रतिरोधकों के साथ लपेट कर एक इस्पात का बॉक्स जिसमे की हवा निकाल कर निर्वात किया गया है उसमे डाल देते है जिसको हम "कोल्ड बॉक्स" कहते है|

हीलियम द्रवीकरण सयंत्र जो हमारे द्वारा बनाया गया है उसमे दो पश्चाग्र विस्तारक इंजन 50 केल्विन और 20 केल्विन के बीच में संचालित होते है। ये विस्तारक इंजन “फाइबर सुदृढ़कृत प्लास्टिक” (ऍफ़ आर. पी) के बने होते है। जिसका अतिनिम्न एवं सामान्य तापमान पर जंगरोधी इस्पात के इसकी पूरी लम्बाई में ऊष्मीय विस्तारण एवं संकुचन लगभग एकसमान होता है। इसके परिणास्वरूप ऊष्मा के छरण की संभावना अतिनिम्न एवं सामान्य तापमान के बीच कम रहती है।

सयंत्र के कुछ यंत्र सामान्य तापमान पर कार्य करते है जैसे की गतिपाल पहिया, वॉल्ब, कार्य निष्कर्षण एवं ब्रेक यंत्र आदि। जबकि अधिकतर यंत्र कोल्ड बॉक्स के अंदर अतिनिम्न तापमान पर काम करते है जैसे पश्चाग्र विस्तारक, ऊष्मा विनिमयको का समूह, एवं क्रायोजेनिक वाल्व आदि। पिस्टन एवं इस्पात लाइनर के बीच खाली जगह को निरर्थक आयतन कहते है यह आयतन विस्तारण दक्षता को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। सयंत्र के प्रमुख अवययों का विकास जैसे कि क्रायोजेनिक्स बाल्व, विस्तारक इंजन, ऊष्मा विनिमयको का समूह और दूसरे मुख्य भाग अपने प्रभाग में ही बनाये गए है। कार्य निष्कर्षण युक्ति के तौर पर गाड़ियो में प्रयोग होने वाले आवर्तित्र में कुछ परिवर्तित कर उपयोग में लिया गया है। पावर जनित्र सप्लाई से लोड को कम ज्यादा करके इंजिन के गति को नियंत्रित करते है।

विस्तारक इंजिन आधारित सयंत्र का लाभ यह है की इसके विस्तारण के कारण तापमान में ज्यादा गिरावट होती है क्योंकि यह ज्यादा दाब के अनुपात पर काम करता है। इसकी तुलना में दूसरी प्रणाली जैसे कि टरबाइन में कम दाब के अनुपात पर काम करने के कारण तापमान में भी कम गिरावट होती है। सामान प्रशीतन प्रभाव प्राप्त करने के लिये टरबाइन आधारित सयंत्र में ज्यादा प्रवाह की आवश्यकता होती है और इसमें ऊष्मा विनिमयको का आकार भी अपेक्षाकृत ज्यादा बड़ा होता है।

फिलहाल हमारे सयंत्र में छह एल्युमीनियम प्लेट फिन ऊष्मा विनिमयको का प्रयोग किया गया है। ये सभी विशेष रूप से भारतीय निर्माता के द्वारा बनवाये गए है। विस्तारण प्रकिर्या के दौरान गैस की प्रशीतन को सभी ऊष्मा विनिमयको द्वारा सोख लिया जाता है, और एक समय ऐसा आता है की तापमान धीरे -धीरे ठंडा होते होते 7 केल्विन और इससे नीचे चला जाता है। अंत में गैस जूल थॉमसन प्रसारक वॉल्ब में पहुंचती है इस क्रिया में गैस का कुछ भाग हीलियम की फुहार में परिवर्तित हो जाता है। फुहार की मात्रा जूल थॉमसन प्रसारक वॉल्ब में प्रवेश लेने वाली गैस की तापमान और दाब के ऊपर निर्भर करता है। इस जूल थॉमसन वॉल्ब का अभिकल्पन, निर्माण एवं उससे जुड़े सारे परीक्षण अपने ही प्रभाग में किया गया है। सबसे अंत में यह हीलियम की फुहार प्रभावी संघनन से द्रव हीलियम में बदल जाती है। यह द्रव विशेष रूप से निर्मित एक इस्पात की फ्लास्क में जिसको हम क्रायोजेनिक्स के भाषा में "डीवार" कहते है यह वैज्ञानिक जेम्स डीवार के नाम पर है , उसमे एकत्रित हो जाता है। यह डीवार के अंदर के तापमान और दाब के स्थिरता के ऊपर निर्भर करता है।

हीलियम द्रवीकरण सयंत्र के लम्बे समय तक निरन्तर चलते रहने से उसमे कुछ प्रभावी अशुद्धियाँ जैसे संपीडन के दौरान तेल की अल्प मात्रा उच्च दाब वाली गैस में मिल जाना है। उसके निस्तारण के लिए हमने अपने यहाँ एक प्रभावी तेल पृथक युक्ति बनाया है। इसका अभिकल्पन अपने ही प्रभाग किया गया है एवं इसका निर्माण स्थानीय निर्माता ने किया है। इस प्रभावी तेल पृथक सयंत्र में स्थानीय रूप से उपलब्ध सक्रिय चारकोल को प्रयोग में लाया गया है।

मुख्य संपीडक (मॉडल सी.4यू217.4जी) जो लगभग 230 पाउंड प्रति स्क्वायर इंच दाब पर तेल मुक्त उच्च दबाव वाली शुद्ध हीलियम गैस की आपूर्ति सयंत्र को बनाए रखता है, और लगभग 2 पाउंड प्रति स्क्वायर इंच निम्न दबाव वाली गैस वापस संपीडक के सक्शन द्वार तक पहुंचाता है । यह संपीडक भी भारतीय निर्माता मैसर्स सुल्जर इंडिया लिमिटेड द्वारा आपूर्ति किया गया है। वर्तमान में यह कंपनी बर्कहार्ट कंप्रेसर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के रूप में जानी जाती है। संपीड़न के दौरान हीलियम की उच्च गर्मी को संभालने के लिए, निर्माता ने अतिरिक्त शीतन के लिए संपीडक को उचित रूप से संशोधित किया है। निम्न दबाव के दौरान संपीडक में हवा के प्रवेश से बचने के लिए, आर. आर. केट में लगाने के बाद, हमारे द्वारा संपीडक की प्रक्रिया सर्किट में मामूली बदलाव किए गए है।

हीलियम द्रवीकरण के दर को बढ़ाने के लिये समय-समय पर जरूरी बदलाव किया गए हैं। हमने अपने दूसरे संस्करण में अलग से तरल नाइट्रोजन प्री कूलर स्टेज को सयंत्र के साथ जोड़ा और इसकी साथ बड़े साइज के बहु धारा वाले ऊष्मा विनिमयको को विभिन्न मानकों के अनुकूल बनाकर सयंत्र के साथ जोड़ा। इससे सयंत्र की द्रवीकरण को 20 लीटर/घंटे तक बढ़ाने में कामयाब हो गए। लेकिन ऊष्मा विनिमयको का समूह जो शेल एवं ट्यूब पर आधारित था उसकी कुछ सीमाएं है। जैसे उच्च प्रवाह पर उन्नत प्रशीतन दर आदि, जिसके कारण इन ऊष्मा विनिमयको के साथ ज्यादा द्रवीकरण को बढ़ाना संभव नहीं था।

हीलियम द्रवीकरण की दर को और बढ़ाने के लिए, विशाल प्रशीतन क्षमता वाले नए आधुनिक उन्नत प्रकार के क्रायोजेनिक विस्तारक इंजनों का अभिकल्पन और निर्माण किया गया। उच्च ऊष्मा हस्तांतरण दर वाले, प्रभावशील एल्यूमीनियम प्लेट फिन ऊष्मा विनिमयको को स्थानीय विक्रेता के माध्यम से विकसित किया गया। उनको उचित स्थान इनके ऊष्मीय लक्षण के आधार पर नए संस्करण के साथ जोड़ दिया गया और परिक्षण के दौरान द्रवीकरण के दर में उत्तोरत्तर बृद्धि दर्ज की गयी। इस संस्करण को अब और ज्यादा हीलियम प्रवाह की आवश्यकता होने लगी। जिसके कारण हमने कैजर मेक मॉडल सी.डी.एस.102 संपीडक को पुराने सुल्जर संपीडक के साथ जोड़ा। जिससे हमें अच्छे परिणाम मिले। आगे एक ग्राफ के माध्यम से जूल थॉमसन वॉल्ब के प्रवेश पर कूल डाउन प्रोफ़ाइल, जो की क्षमता का प्रतीक है को दर्शाया गया है।

यह तापमान प्रोफाइल, 250 लीटर क्षमता वाले मुख्य दीवार के साथ दिखाया गया है। चूंकि द्रव हीलियम स्थानांतरण लाइन और क्रायोजेनिक दीवार दोनों सामान्य तापमान पर थे, बिंदु 1 जो इसके शुरू होने से पहले का जूल थॉमसन वाल्व के प्रारंभिक तापमान को दिखाता है। उसके बाद जूल थॉमसन वाल्व खोला गया और सयंत्र ठंडा होना शुरू हो गया। कुछ घंटों के अंतराल के बाद तापमान पूर्वाकांक्षित तक पहुंच गया। इससे सयंत्र के मुख्य दीवार के अंदर में हीलियम गैस की धुंध का बनना शुरू हो गयी, और इसे बिंदु 2 द्वारा दिखाया गया है।

चित्र 2 हीलियम द्रवीकरण प्रक्रिया के दौरान समय के साथ सयंत्र के विभिन्न बिंदुओं पर तापमान प्रोफ़ाइल
चित्र 2 हीलियम द्रवीकरण प्रक्रिया के दौरान समय के साथ सयंत्र के विभिन्न बिंदुओं पर तापमान प्रोफ़ाइल


क्रायोजेनिक दीवार में वास्तविक तरल हीलियम संग्रह बिंदु 3 पर शुरू हुआ। इसका सत्यापन द्रवस्तर गेज मापक द्वारा किया गया। लगभग पांच घंटे के स्थिर ऑपरेशन के बाद मुख्य दीवार भर गया। इसके बाद के परीक्षण के दौरान सयंत्र को एक हज़ार लीटर हीलियम दीवार के साथ एकीकृत किया गया। चित्र 3 में 1000 लीटर तरल हीलियम क्षमता वाले मुख्य दीवार के साथ स्वदेशी हीलियम द्रवीकरण सयंत्र की तस्वीर दिखाई गयी है।

चित्र 3 स्वदेशी हीलियम द्रवीकरण सयंत्र का फोटो एवं उसके सहायक यंत्र
चित्र 3 स्वदेशी हीलियम द्रवीकरण सयंत्र का फोटो एवं उसके सहायक यंत्र


हीलियम द्रवीकरण के वर्तमान संस्करण में सभी ऊष्मा विनिमयको में सुधार किया गया है, जिसमे सभी को एल्यूमीनियम प्लेट फिन ऊष्मा विनिमयको में बदल दिया गया है। इन उच्च दक्षता वाले एल्यूमीनियम प्लेट फिन ऊष्मा विनिमयको को भारत में ही निर्मित किया गया है। यह देश में पहली बार है जब भारत निर्मित सभी एल्यूमीनियम ऊष्मा विनिमयको को हीलियम द्रवीकरण प्रणाली में सफलतापूर्वक प्रयोग किया गया है। बड़ी क्षमता वाले विस्तारक इंजन, क्रायोजेनिक वाल्व और छह एल्यूमीनियम ऊष्मा विनिमयको के साथ, हमारे स्वदेशी हीलियम द्रवीकरण की क्षमता वर्तमान संस्करण में लगभग 44 लीटर/ घंटा तक पहुंच गई है।

वर्तमान में अत्यधिक फ्लैश-ऑफ नुकसान को कम करने के लिए द्रवीकरण प्रणाली में हीलियम ट्रांसफर लाइन में संशोधन किया जा रहा है। इसके लिए नई द्रव हीलियम ट्रांसफर लाइन बनाना और हीलियम वाष्प प्रबंधन का नया अभिकल्पन और उसके नए प्रयोग पर कम चल रहा है। हालांकि मशीन की प्रशीतन क्षमता, डिजाइन क्षमता से मेल खाती है। इसे कार्यन्वित करने के लिए हीलियम गैस को द्रवीकरण करने वाली वर्तमान प्रणाली के कोल्ड एन्ड में बहुत सारे काम किए जाने की आवश्यकता है।

द्रवीकरण के बाद द्रव को प्रयोगों के लिए अलग अलग प्रयोगशालाओ में भेज दिया जाता है प्रयोग के दौरान द्रव गैस में बदल जाती है चूँकि हीलियम एक महंगी गैस है और इसलिए इसको रीसायकल करते है और आगे वह गैस पाइपो के द्वारा गैस बैग में आ जाती है और वापस गैस कंप्रेस करके उच्च दाब वाले सिलिंडरों में भर लिए जाते है ।

इस गैस में कुछ अशुद्धियाँ भी आ जाती है, जिसको बार-बार निकालने आवश्यकता होती है। इसलिए इस सयंत्र प्राणाली में एकीकृत हीलियम शोधक के उपयोग की आवश्यकता है। एकीकृत हीलियम शोधक का अभिकल्पन अपने उन्नत चरण में है, और हम इसे निकट भविष्य में बनाने और सयंत्र के साथ जोडने की उम्मीद करते हैं।

इस स्वदेशी संयत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए इसका समय-समय पर उन्नयन एवम् रख-रखाव समर्पित दक्ष इंजिनियरों एव तकनीशियनों के द्वारा किया जाता है ।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें

श्री विजेंद्र प्रसाद
प्रमुख, निम्‍नतापीय इंजीनियरिंग एवं निम्नताप चुंबक प्रौद्यौगिकी अनुभाग
फोन: +91-731-248-8273
ईमेल: vijen (at) rrcat.gov.in


विषय प्रबंधक:
श्री मनोज कुमार
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अंतिम नवीनीकरण: दिसम्बर 2018
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